आपके खेत के लिए मौसम पर आधारित और मिट्‌टी की जांच पर आधारित एक निजी सलाहकार, जो खेत की तैयारी से लेकर फसल की कटाई तक सभी कामों की पूरी सूची प्रदान करता है। खेती की उपज में सुधार में मदद के लिए हमारी सलाह में, तकनीक और अनुभव का तालमेल किया गया है।

"खेती की उपज में सुधार में मदद के लिए हमारी सलाह में, तकनीक और अनुभव का तालमेल किया गया है।

आपके तालुका, फसल, सीज़न, खेत के साइज़, रोपाई वाली सामग्री, बुवाई की तारीख और कई अन्य मापदंडों के अनुसार इस कैलेंडर को हर खेत के हिसाब से निजी बनाया जाता है जो आपके खेत और फसल के अनुसार उपयुक्त एक सटीक वैज्ञानिक कैलेंडर बन जाता है।

खेत की तैयारी, बीज का उपचार, बुवाई, फसल की योजना, उर्वरक डालना, सिंचाई, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीड़ों-मकोड़ों, रोगों और खरपतवारों से सुरक्षा, फसल की बढ़वार, तथा कटाई आदि सारी चीज़ों को इस पूरी सलाह में शामिल किया जाता है।"

भारतीय किसानों की फसलों को प्रभावित करने वाले कीड़ों-मकोड़ों और रोगों की पहचान से जुड़ी उनकी चुनौतियां हल करने में उनकी मदद करना ही कृष- ई का उद्देश्य है।

"क्या आप यह जानना चाहेंगे कि आपकी फसल को कौन से कीड़े और रोग प्रभावित कर रहे हैं? आपकी फसल किन पोषक तत्वों की कमी से ग्रस्त है?

बस अपनी फसल का एक फोटो खींचकर अपलोड करें, और इन सभी समस्याओं का तुरंत समाधान प्राप्त करें। कृष- ई निदान, आपकी फसलों की सेहत का सच्चा साथी है, और यह आपको यही जांच और वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराता है। कीड़ों-मकोड़ों और रोगों की समय पर पहचान करें और अपनी फसल की उत्पादकता बढ़ाएं।

भारतीय किसानों की फसलों को प्रभावित करने वाले कीड़ों-मकोड़ों और रोगों की पहचान से जुड़ी उनकी चुनौतियां हल करने में उनकी मदद करना ही महिंद्रा समूह का उद्देश्य है। कृष- ई निदान एक उपयोगी टूल है, जो हमारे खास एल्गोरिद्‌म और डिजिटल प्लेटफार्म से चलता है और जो फोटो भेजने वाले किसानों को फसलों के रोग जानने और तुरंत समाधान प्राप्त करने में मदद कर सकता है।"

कृष- ई रेंटल ऐप से किसान अपनी सुविधानुसार किराए के उपकरण बुक कर सकते हैं।

"कृष- ई रेंटल, किसानों के लिए मांग आधारित कृषि उपकरण किराएदारी का प्लेटफार्म है। ऐप के जरिए कृष- ई से किसान, खेती के आधुनिक उपकरणों के लिए आर्डर कर सकते हैं, और उपयोग के हिसाब से भुगतान कर सकते हैं। सर्विस दिए जाने वाले गाँव में खेती के उपकरण कृष- ई रेंटल उद्यमी या कृष- ई डीलर के यहां से भेजे जाएंगे। कृष- ई, समय पर तथा अच्छी क्वॉलिटी वाली सेवा, कम दामों में अनेक उपकरणों तक पहुंच प्रदान करती है। छोटी और बड़ी जोत वाले किसान अब भरोसेमंद सेवा से लाभ उठा सकते हैं जो लाइव ट्रैकिंग और सपोर्ट देने वाले तकनीकी प्लेटफार्म पर आधारित है।

किसान अपने इलाकों में नए उपकरणों को और उनकी कीमतों की खोजबीन कर सकते हैं। इलाके के अन्य किसानों के लिए बुकिंग करना, और कई खेतों का प्रबंधन करना, इसकी अन्य खूबियों में शामिल है।"

"अपने खेतों में ई-क्रांति का लाभ उठाने के लिए खेती का कृष- ई तरीका अपनाएं!
१८००-२६६-१५५५ पर कॉल करके हमारे सहायक से बात करें और एक बुकिंग करें।"

कृष- ई के साथ तरक्की

कृष- ई ने लाखों चैम्पियन किसानों को तैयार करने के युग की शुरुआत की है

भारतीय खेती को नया रूप देने के लिए, लाखों किसानों को उनके खेतों से सर्वोत्तम उत्पादकता और लाभप्रदता पाने के लिए सशक्त बनाना कृष- ई का लक्ष्य है।

कैलास मोरे गाँव - पूरी

जिला - औरंगाबाद

श्री कैलास मोरे, कृष- ई तकनीक प्लॉट किसान हैं, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के निवासी हैं। ८ महीने पहले, उन्होंने अपनी फसल के लिए कृष- ई गन्ना डिजिटल कैलेंडर अपनाया। कृष- ई की एडवाइजरी और ऐप सपोर्ट की मदद से, इस समय उनकी गन्ने की फसल में गांठाों का आकार ७.५ इंच और मोटाई का आकार ३.५ इंच है। इसका श्रेय फसल प्रबंधन की अच्छी पद्धतियों को जाता है, जिनमें खेत की तैयारी, बीज का चुनाव, बीज उपचार व अन्य शामिल हैं, जिनसे उन्हें पिछले वर्ष की तुलना में खेती की लागत १२% कम करने में मदद मिली है।

अंकुश डोडमिसे गाँव - सदोबाचीवाड़ी बारामती

जिला - पुणे

पुणे में सदोबाचीवाडी बारामती गाँव के श्री अंकुश डोडमिसे एक प्रगतिशील किसान हैं जो अपनी फसलों की देखभाल के लिए कृष- ई गन्ना डिजिटल एडवाइजरी का उपयोग करते हैं। उन्होंने समय-समय पर हमारे कार्यक्रमों, जैसे कि खेत की तैयारी, बीज का चुनाव, बीज का उपचार, ह्यूमिक + फॉस्फोरिक एसिड से भिगोना आदि का लाभ लिया। इन सभी तकनीकों की मदद से, वर्तमान में उनके यहां बड़ी संख्या में कल्ले आए हैं, जो लगभग ७-८ हैं, जिनसे उन्हें ८०% तक अंकुरण मिल रहा है।

दारा प्रताप सिंह रघुबंशी गाँव - ग्रेटिया

जिला - छिंदवाड़ा

श्री दारा प्रताप सिंह रघुबंशी, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ग्रेटिया, तहसील-चौराई के एक प्रगतिशील किसान हैं जिन्होंने कृष- ई टीम की मदद से मशीनीकरण के तरीके अपनाए हैं। न्यूमैटिक प्लांटर्स के उपयोग से बुवाई की सही गहराई और बीज से बीज और कतार से कतार के बीच सटीक दूरी मिलती है। परिणामस्वरूप, अंकुरण एक समान हुआ है और संकर मक्का के बीजों की उत्पादन लागतों में कमी आई है।

हेमंत वर्मा गाँव - हटोदा

जिला - छिंदवाड़ा

हेमंत वर्मा से मिलिए। वह मध्य प्रदेश के हटोदा गाँव के उन्नत किसान हैं। कृष- ई टीम की सहायता और मार्गदर्शन के साथ, उन्होंने कृष- ई की एग्रोनामिक विधियां, जैसे कि खेत की तैयारी और कटाई को अपनाया। इन विधियों का उपयोग करने से उनकी फसलों की अच्छी वृद्धि हुई है और पिछले साल की तुलना में उन्हें इस बार अधिक उपज की उम्मीद है।

मनोजभाई गणेशभाई भेसादडिया गाँव - मोती बनुगर

जिला - जामनगर

शुरू में, श्री मनोजभाई गणेशभाई भेसादडिया पारंपरिक तरीकों से खेतों करते थे, फ्लड सिंचाई करते थे, और रासायनिक उर्वरकों की दी जाने वाली मात्रा पर अधिक नियंत्रण नहीं कर पाते थे, जिससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ गई थी। लेकिन उनके अनुकूलनशील नज़रिए और नई व नवप्रवर्तक विधियां सीखने की इच्छा ने उनके लिए सफलता की राह खोल दी। कृष- ई टीम की मदद और मार्गदर्शन से उन्होंने अब एमआईएस इंस्टॉल किया और कृष- ई के सहयोग से केवीके फसल देखभाल टीम द्वारा दह जाने वाली कृषि सेवाओं के आधार पर कपास की खेती भी करते हैं।

रमेशभाई गोरधनभाई चोवतिया गाँव - मोटा थावरिया

जिला - जामनगर

पारंपरिक तरीकों और सिंचाई विधियों का उपयोग करते हुए, श्री रमेशभाई गोरधनभाई चोवतिया ने रासायनिक उर्वरकों की दी जाने वाली मात्रा पर अधिक नियंत्रण नहीं किया, जिससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ गई थी। इसके अलावा, वर्षा और जल स्रोतों की कमी की वजह से कपास की उपज भी काफी कम हो गई थी। कपास की खेती की विधियों, रासायनिक और पानी में घुलनशील उर्वरकों के विविध प्रयोग की सही जानकारी, तथा कृष- ई टीम द्वारा समय-समय पर खेत की विजिट से, आज वे कपास की अपनी खेती और अपने निवेश पर मिले फायदे से बहुत खुश हैं।

पेनुगांती पापाराव गाँव - येंदगंती

जिला - पश्चिम गोदावरी

आंध्र प्रदेश के येंदगंती गाँव के श्री पेनुगांती पापाराव, एक प्रगतिशील किसान हैं जो उन्नत कृषि विधियां अपनाते हैं। कृष- ई टीम की मदद से, उन्होंने मैट नर्सरी विधि के साथ अपने खेतों में मशीनों से धान रोपाई की विधियों को सफलतापूर्वक अपनाया। परिणाम - उत्पादकता में ३५२५ किग्रा/एकड़ से ३७५० किग्रा/एकड़ तक की बढ़ोत्तरी हुई।