कृष-ई सलाहकार सेवा किसानों को प्रति एकड़ उपज, आय बढ़ाने और खेती की लागत को कम करने में मदद करता है।

हमारी सलाहकार टीम के विशेषज्ञ फसल की अवस्था के प्रत्येक चरण में किसानों को परामर्श सेवाएं प्रदान करते हैं, जिससे किसानों को फसल बुआई की योजना बनाने से लेकर फसल की कटाई तक आने वाली समस्याओं में मदद मिलती हैं। हमारी सलाहकार सेवा किसानों को सर्वोत्तम कृषि परामर्श सेवाएं प्रदान करती हैं और किसानों को उनके खेतों में खेती के आधुनिक उपकरण और नई तकनीक का उपयोग करने में सहायता करते हैं।

कृष-ई तकनीक प्लॉट्स

कृष-ई के 950 तकनीक प्लॉट्स ने हमारी विशेषज्ञता और विचारों के सकारात्मक परिणाम को प्रदर्शित किया :

हमारी कृषि सलाहकार सेवाओं ने पूरे भारत में 950 किसानों के साथ 2 वर्षों तक विभिन्न फसलों पर काम किया। इन किसानो के खेतो पर 'तकनीक प्लॉट' विकसित किए गए जहां किसानों को दिखाया गया कि कैसे कृष-ई की सलाहकार सेवा के साथ खेती करना है जैसे कि फसल बुआई की योजना बनाना, बीज उपचार, उचित उर्वरक उपयोग और बहुत कुछ। किसानों ने अपने डिजिटल खेती में कृष-ई की कृषि सलाहकार सेवाओं द्वारा प्रति एकड़ अधिक उत्पादन तथा आय में सुधार देखा।

कृष-ई की सलाहकार टीम के कृषि विशेषज्ञ तथा कृषि दूत किसानों को खेती की जानकारी और अनुभव तक आसान पहुँच प्रदान करते है :

हमारे कृषि विशेषज्ञ आपको फसलों की वैज्ञानिक खेती के तरीके बताते हैं और कृषिदूत आपको खेती करने का अनुभव प्रदान करते हैं और आपके अनुभव के साथ हमारी कृषि सलाहकार सेवाएं आपके खेत में बेहतर परिणाम लाने में आपकी सहायता करती हैं।

कृष-ई के डिजिटल समाधान में हम किसानों को मोबाइल ऐप्स और 24 x 7 दिन कृष-ई-सहायक केंद्र से मार्गदर्शन देते हैं, जो किसानों को हमारी कृषि सलाहकार सेवाओं, विशेषज्ञता और खेती समाधानों तक आसान पहुंच प्रदान करते हैं।

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कृष- ई के साथ तरक्की

कृष- ई ने लाखों चैम्पियन किसानों को तैयार करने के युग की शुरुआत की है

भारतीय खेती को नया रूप देने के लिए, लाखों किसानों को उनके खेतों से सर्वोत्तम उत्पादकता और लाभप्रदता पाने के लिए सशक्त बनाना कृष- ई का लक्ष्य है।

कैलास मोरे गाँव - पूरी

जिला - औरंगाबाद

श्री कैलास मोरे, कृष- ई तकनीक प्लॉट किसान हैं, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के निवासी हैं। ८ महीने पहले, उन्होंने अपनी फसल के लिए कृष- ई गन्ना डिजिटल कैलेंडर अपनाया। कृष- ई की एडवाइजरी और ऐप सपोर्ट की मदद से, इस समय उनकी गन्ने की फसल में गांठाों का आकार ७.५ इंच और मोटाई का आकार ३.५ इंच है। इसका श्रेय फसल प्रबंधन की अच्छी पद्धतियों को जाता है, जिनमें खेत की तैयारी, बीज का चुनाव, बीज उपचार व अन्य शामिल हैं, जिनसे उन्हें पिछले वर्ष की तुलना में खेती की लागत १२% कम करने में मदद मिली है।

अंकुश डोडमिसे गाँव - सदोबाचीवाड़ी बारामती

जिला - पुणे

पुणे में सदोबाचीवाडी बारामती गाँव के श्री अंकुश डोडमिसे एक प्रगतिशील किसान हैं जो अपनी फसलों की देखभाल के लिए कृष- ई गन्ना डिजिटल एडवाइजरी का उपयोग करते हैं। उन्होंने समय-समय पर हमारे कार्यक्रमों, जैसे कि खेत की तैयारी, बीज का चुनाव, बीज का उपचार, ह्यूमिक + फॉस्फोरिक एसिड से भिगोना आदि का लाभ लिया। इन सभी तकनीकों की मदद से, वर्तमान में उनके यहां बड़ी संख्या में कल्ले आए हैं, जो लगभग ७-८ हैं, जिनसे उन्हें ८०% तक अंकुरण मिल रहा है।

दारा प्रताप सिंह रघुबंशी गाँव - ग्रेटिया

जिला - छिंदवाड़ा

श्री दारा प्रताप सिंह रघुबंशी, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ग्रेटिया, तहसील-चौराई के एक प्रगतिशील किसान हैं जिन्होंने कृष- ई टीम की मदद से मशीनीकरण के तरीके अपनाए हैं। न्यूमैटिक प्लांटर्स के उपयोग से बुवाई की सही गहराई और बीज से बीज और कतार से कतार के बीच सटीक दूरी मिलती है। परिणामस्वरूप, अंकुरण एक समान हुआ है और संकर मक्का के बीजों की उत्पादन लागतों में कमी आई है।

हेमंत वर्मा गाँव - हटोदा

जिला - छिंदवाड़ा

हेमंत वर्मा से मिलिए। वह मध्य प्रदेश के हटोदा गाँव के उन्नत किसान हैं। कृष- ई टीम की सहायता और मार्गदर्शन के साथ, उन्होंने कृष- ई की एग्रोनामिक विधियां, जैसे कि खेत की तैयारी और कटाई को अपनाया। इन विधियों का उपयोग करने से उनकी फसलों की अच्छी वृद्धि हुई है और पिछले साल की तुलना में उन्हें इस बार अधिक उपज की उम्मीद है।

मनोजभाई गणेशभाई भेसादडिया गाँव - मोती बनुगर

जिला - जामनगर

शुरू में, श्री मनोजभाई गणेशभाई भेसादडिया पारंपरिक तरीकों से खेतों करते थे, फ्लड सिंचाई करते थे, और रासायनिक उर्वरकों की दी जाने वाली मात्रा पर अधिक नियंत्रण नहीं कर पाते थे, जिससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ गई थी। लेकिन उनके अनुकूलनशील नज़रिए और नई व नवप्रवर्तक विधियां सीखने की इच्छा ने उनके लिए सफलता की राह खोल दी। कृष- ई टीम की मदद और मार्गदर्शन से उन्होंने अब एमआईएस इंस्टॉल किया और कृष- ई के सहयोग से केवीके फसल देखभाल टीम द्वारा दह जाने वाली कृषि सेवाओं के आधार पर कपास की खेती भी करते हैं।

रमेशभाई गोरधनभाई चोवतिया गाँव - मोटा थावरिया

जिला - जामनगर

पारंपरिक तरीकों और सिंचाई विधियों का उपयोग करते हुए, श्री रमेशभाई गोरधनभाई चोवतिया ने रासायनिक उर्वरकों की दी जाने वाली मात्रा पर अधिक नियंत्रण नहीं किया, जिससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ गई थी। इसके अलावा, वर्षा और जल स्रोतों की कमी की वजह से कपास की उपज भी काफी कम हो गई थी। कपास की खेती की विधियों, रासायनिक और पानी में घुलनशील उर्वरकों के विविध प्रयोग की सही जानकारी, तथा कृष- ई टीम द्वारा समय-समय पर खेत की विजिट से, आज वे कपास की अपनी खेती और अपने निवेश पर मिले फायदे से बहुत खुश हैं।

पेनुगांती पापाराव गाँव - येंदगंती

जिला - पश्चिम गोदावरी

आंध्र प्रदेश के येंदगंती गाँव के श्री पेनुगांती पापाराव, एक प्रगतिशील किसान हैं जो उन्नत कृषि विधियां अपनाते हैं। कृष- ई टीम की मदद से, उन्होंने मैट नर्सरी विधि के साथ अपने खेतों में मशीनों से धान रोपाई की विधियों को सफलतापूर्वक अपनाया। परिणाम - उत्पादकता में ३५२५ किग्रा/एकड़ से ३७५० किग्रा/एकड़ तक की बढ़ोत्तरी हुई।