स्मार्ट समाधानों से मिलने वाले नतीजे पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत ही बेहतर, ज्यादा तेज होते हैं और कम खर्च में फसल की बेहतर उपज प्रदान करते हैं। कृष- ई स्मार्ट समाधानों को, किसी भी साइज़ वाले खेतों पर इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि वे पूरे सिस्टम सहित खरीदने के अलावा किराये पर/सदस्यता योजना के साथ भी उपलब्ध होते हैं।

यही असली चुनौती है, खेती की असली चुनौतियों पर कार्य करने से ही असली परिणाम मिलते हैं।

कीटनाशक का उपयोग कम करने के लिए अंगूर में कीड़ों का नियंत्रण

"भारत में अंगूर की खेती में रोगों/कीड़ों-मकोड़ों, कीटनाशकों का अत्यधिक इस्तेमाल किए जाने, और उपज के मौसम में अंगूर की बेलों में इन्फेक्शन की पहचान करने के लिए खेती के कुशल जानकारों की कमी आदि समस्याएं देखने में आती हैं।

रोगों की पहचान और जियोलोकेटिंग करने से प्रकोप जल्दी और सटीकता से नियंत्रित होता है।"

उर्वरकों का उचित मात्रा में इस्तेमाल करने के लिए मिट्‌टी की जांच

आपके पूरे खेत में मिट्टी की गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती, और उर्वरकों की खपत की क्षमता भी एक समान नहीं होती है। हमारे वैज्ञानिक नक्शे, आपको आपके खेत के अलग-अलग हिस्सों के लिए उर्वरक की सही ज़रूरी मात्रा बताते हैं।

प्रेसिजन टार्गेटिंग (सटीक लक्ष्य बनाने) के लिए ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव

ड्रोन तकनीक के साथ नए जमाने की प्रेसिजन खेती, जो कीटनाशकों और घुले हुए उर्वरकों को खेत में डालने में मदद करती है।

गन्ने की सबसे सटीक कटाई

क्या आपका गन्ना एकदम पक गया है और कटाई के लिए तैयार है? हमारी तकनीकें आपको यह बताएंगी कि गन्ना कब पक गया है और कटाई के लिए तैयार है, जिससे आपको इससे सबसे बेहतर उत्पादन मिलेगा। इससे आपको, फसल कटाई की व्यवस्था भी पहले से ही तय करने में मदद मिलेगी।

अपने खेतों में ई-क्रांति का लाभ उठाने के लिए खेती का कृष- ई तरीका अपनाएं!
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कृष- ई के साथ तरक्की

कृष- ई ने लाखों चैम्पियन किसानों को तैयार करने के युग की शुरुआत की है

भारतीय खेती को नया रूप देने के लिए, लाखों किसानों को उनके खेतों से सर्वोत्तम उत्पादकता और लाभप्रदता पाने के लिए सशक्त बनाना कृष- ई का लक्ष्य है।

कैलास मोरे गाँव - पूरी

जिला - औरंगाबाद

श्री कैलास मोरे, कृष- ई तकनीक प्लॉट किसान हैं, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के निवासी हैं। ८ महीने पहले, उन्होंने अपनी फसल के लिए कृष- ई गन्ना डिजिटल कैलेंडर अपनाया। कृष- ई की एडवाइजरी और ऐप सपोर्ट की मदद से, इस समय उनकी गन्ने की फसल में गांठाों का आकार ७.५ इंच और मोटाई का आकार ३.५ इंच है। इसका श्रेय फसल प्रबंधन की अच्छी पद्धतियों को जाता है, जिनमें खेत की तैयारी, बीज का चुनाव, बीज उपचार व अन्य शामिल हैं, जिनसे उन्हें पिछले वर्ष की तुलना में खेती की लागत १२% कम करने में मदद मिली है।

अंकुश डोडमिसे गाँव - सदोबाचीवाड़ी बारामती

जिला - पुणे

पुणे में सदोबाचीवाडी बारामती गाँव के श्री अंकुश डोडमिसे एक प्रगतिशील किसान हैं जो अपनी फसलों की देखभाल के लिए कृष- ई गन्ना डिजिटल एडवाइजरी का उपयोग करते हैं। उन्होंने समय-समय पर हमारे कार्यक्रमों, जैसे कि खेत की तैयारी, बीज का चुनाव, बीज का उपचार, ह्यूमिक + फॉस्फोरिक एसिड से भिगोना आदि का लाभ लिया। इन सभी तकनीकों की मदद से, वर्तमान में उनके यहां बड़ी संख्या में कल्ले आए हैं, जो लगभग ७-८ हैं, जिनसे उन्हें ८०% तक अंकुरण मिल रहा है।

दारा प्रताप सिंह रघुबंशी गाँव - ग्रेटिया

जिला - छिंदवाड़ा

श्री दारा प्रताप सिंह रघुबंशी, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ग्रेटिया, तहसील-चौराई के एक प्रगतिशील किसान हैं जिन्होंने कृष- ई टीम की मदद से मशीनीकरण के तरीके अपनाए हैं। न्यूमैटिक प्लांटर्स के उपयोग से बुवाई की सही गहराई और बीज से बीज और कतार से कतार के बीच सटीक दूरी मिलती है। परिणामस्वरूप, अंकुरण एक समान हुआ है और संकर मक्का के बीजों की उत्पादन लागतों में कमी आई है।

हेमंत वर्मा गाँव - हटोदा

जिला - छिंदवाड़ा

हेमंत वर्मा से मिलिए। वह मध्य प्रदेश के हटोदा गाँव के उन्नत किसान हैं। कृष- ई टीम की सहायता और मार्गदर्शन के साथ, उन्होंने कृष- ई की एग्रोनामिक विधियां, जैसे कि खेत की तैयारी और कटाई को अपनाया। इन विधियों का उपयोग करने से उनकी फसलों की अच्छी वृद्धि हुई है और पिछले साल की तुलना में उन्हें इस बार अधिक उपज की उम्मीद है।

मनोजभाई गणेशभाई भेसादडिया गाँव - मोती बनुगर

जिला - जामनगर

शुरू में, श्री मनोजभाई गणेशभाई भेसादडिया पारंपरिक तरीकों से खेतों करते थे, फ्लड सिंचाई करते थे, और रासायनिक उर्वरकों की दी जाने वाली मात्रा पर अधिक नियंत्रण नहीं कर पाते थे, जिससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ गई थी। लेकिन उनके अनुकूलनशील नज़रिए और नई व नवप्रवर्तक विधियां सीखने की इच्छा ने उनके लिए सफलता की राह खोल दी। कृष- ई टीम की मदद और मार्गदर्शन से उन्होंने अब एमआईएस इंस्टॉल किया और कृष- ई के सहयोग से केवीके फसल देखभाल टीम द्वारा दह जाने वाली कृषि सेवाओं के आधार पर कपास की खेती भी करते हैं।

रमेशभाई गोरधनभाई चोवतिया गाँव - मोटा थावरिया

जिला - जामनगर

पारंपरिक तरीकों और सिंचाई विधियों का उपयोग करते हुए, श्री रमेशभाई गोरधनभाई चोवतिया ने रासायनिक उर्वरकों की दी जाने वाली मात्रा पर अधिक नियंत्रण नहीं किया, जिससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ गई थी। इसके अलावा, वर्षा और जल स्रोतों की कमी की वजह से कपास की उपज भी काफी कम हो गई थी। कपास की खेती की विधियों, रासायनिक और पानी में घुलनशील उर्वरकों के विविध प्रयोग की सही जानकारी, तथा कृष- ई टीम द्वारा समय-समय पर खेत की विजिट से, आज वे कपास की अपनी खेती और अपने निवेश पर मिले फायदे से बहुत खुश हैं।

पेनुगांती पापाराव गाँव - येंदगंती

जिला - पश्चिम गोदावरी

आंध्र प्रदेश के येंदगंती गाँव के श्री पेनुगांती पापाराव, एक प्रगतिशील किसान हैं जो उन्नत कृषि विधियां अपनाते हैं। कृष- ई टीम की मदद से, उन्होंने मैट नर्सरी विधि के साथ अपने खेतों में मशीनों से धान रोपाई की विधियों को सफलतापूर्वक अपनाया। परिणाम - उत्पादकता में ३५२५ किग्रा/एकड़ से ३७५० किग्रा/एकड़ तक की बढ़ोत्तरी हुई।